क्या दहेज लेना उचित है?

दहेज लेना या देना दोनो ही कुरीति है इसके लिये किती बहनो के लिए प्रताड़ना झेलनी पड़ती है, न जाने कितनी बेटियां आत्मघात कर लेती हैं।यहां तक दहेज के लिए लोग बहन बेटियों को जिंदा जला देते हैं ,हत्या कर देते हैं।
अनेक कुप्रथाओ  में से एक हैं  “दहेज़ प्रथा” जो आज भी हमारे समाज का ज्वलंत मुद्दा हैं . दहेज़ प्रथा अधिकतर उच्चवर्गीयो में देखने को मिलती  थी लेकिन अब तो यह प्रथा अनेक वर्गो में देखने को मिल रही हैँ. वर पक्ष के लोग तो अपने बेटे के काबिलियत के आधार पर दहेज़ तये करते हैँ अगर लड़का किसी बड़े औधे में हैँ तो वधु पक्ष से मुँह मांगी कीमत मांगी जाती हैँ और अगर लड़की का रंग साँवला हैँ तो उस वजह से अतिरिक्त पैसे की मांग की जाती हैँ.
लेकिन आज पढ़े लिखे मानव समाज को इसे एक बड़ी कुरीति मानकर दहेज रहित शादियां कर रहे हैं ।
अब बीटा बेटी के भेद भाव को खत्म करने के लिए दहेज रहित शादियां करनी चाहिए।
  https://youtu.be/_FRcfrwJ-F8

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