मानव का उत्थान
मानव में मानवीय गुण अनिवार्य होने चाहिए।सभी ब्यसनों से, ,बुराईओं से दूर हो।और परमात्मा की भक्ति करे ,तभी मानव का उत्थान हो सकता हैं।अन्यथा नहीं।
परमात्मा कबीर जी,-
कबीर, मानुष जन्म पाय कर, नहीं रटैं हरि नाम।
जैसे कुंआ जल बिना, बनवाया क्या काम।।
भावार्थ :- मानव जीवन में यदि भक्ति नहीं करता तो वह जीवन ऐसा है जैसेसुंदर कुंआ बना रखा है। यदि उसमें जल नहीं है या जल है तो खारा (पीने योग्यनहीं) है, उसका भी नाम भले ही कुंआ है, परंतु गुण कुंए (ॅमसस) वाले नहीं हैं।इसी प्रकार मनुष्य भक्ति नहीं करता तो उसको भी मानव कहते हैं, परंतु मनुष्यवाले गुण नहीं हैं।

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