सदभक्ति की पहचान



💐 जो भक्ति सभी धर्म की धार्मिक ग्रन्थों  से प्रमाणित होगी। वही सद्भभक्ति है।



           



,💐 गीता अध्याय 4 श्लोक 34 में गीता ज्ञान दाता ने कहा है कि उस ज्ञान को जो परमात्मा अपने मुख कमल से बोलकर सुनाता है जो तत्वज्ञान है उसको तू तत्वदर्शी संत के पास जाकर समझ उनको दंडवत प्रणाम करने से कपट छोड़कर नम्रता पूर्वक प्रश्न करने से तत्व संत तुझे तत्व ज्ञान का उपदेश करेंगे।


💐 जैसे गीता अध्याय 3 श्लोक 12 में बताया गया है कि शास्त्र विधि अनुसार किए गए भक्ति द्वारा बढ़ाये हुए देवताओं अर्थात संसार के वृक्ष की जड़ अर्थात मूल मालिक परम अक्षर ब्रह्म को इस रूप में प्रतिष्ठित कर के भक्ति कर्म से बढ़ी हुई शाखाएं तीनों देवताओं तुम लोगों को बिना मांगे ही फल देते रहेंगे। यदि कोई व्यक्ति उन देवताओं शाखा द्वारा दिए धन में से दान पुण्य नहीं करता अर्थात जो उन्हें शास्त्र अनुकूल साधना नहीं करता केवल अपना ही पेट भरता है स्वयं ही घूमता रहता है वह तो परमात्मा का चोर है।

 सदभक्ति से लाभ




💐परमात्मा के संविधान को मानने के कारण भक्ति करने वाला व्यक्ति कोई अपराध नहीं करता। बल्कि अपराधी व्यक्ति भी जीवन सुधार लेता है।


💐सतभक्ति करने से हमारे जीवन में आने वाले सभी दुःख व कष्ट टल जाते हैं।


💐जिस प्रकार अच्छा धन होने पर व्यक्ति किसी अच्छे शहर में रह सकता है। उसी प्रकार सच्ची भक्ति से जीव अच्छे लोक को प्राप्त होता है।


💐सत्य भक्ति से हम ऐसे स्थान पर जा सकते हैं जहां कभी मृत्यु नहीं होती व वृद्धावस्था नहीं आती।

सत्य भक्ति अपनाएं, जीवन सफल बनाएं।

💐सत भक्ति करने से इंसान के अंदर जितने भी विकार हैं वह अपने आप खत्म हो जाते हैं।


💐भक्ति बिना क्या होत है, ध्रुव से पूछो जाई। 

सवा सेर अन्न पावते, अटल राज दिया ताहिं।।  
भक्ति से क्या होता है ध्रुव भक्त से पूछो जिसे दिन में सवा सेर खाने को मिलता था लेकिन भक्ति की शक्ति से अटल राज्य मिला।

💐भक्ति करने वाला व्यक्ति मौत को हमेशा याद रखता है। मौत को भूल जाने वालों को लताड़ते हुए परमात्मा ने कहा है:-

मौत बिसारी मूर्खा, अचरज किया कौन।
तन मिट्टी में मिल जाएगा, ज्यों आटे में लोन।।

💐भौतिक सुविधाएं होने पर यदि कोई सत्य भक्ति नहीं करता तो वह व्यक्ति पूर्व जन्मों में की गयी भक्ति का ही फल भोग रहा है।

आज यदि सत्य भक्ति नहीं करते तो अगले जन्म में चौरासी में कष्ट उठाना पड़ेगा।

💐भक्ति करने वाला व्यक्ति कभी न कभी पूर्ण संत की शरण प्राप्त कर मोक्ष प्राप्त कर ही लेता है। जबकी भक्ति हीन प्राणी का कुत्ते गधे आदि की योनियों में जाना पक्का है।


💐सच्ची भक्ति करने वाला व परमात्मा पर विश्वास करने वाला व्यक्ति रिश्वत नहीं ले सकता, चोरी नहीं कर सकता, किसी का बुरा नहीं सोच सकता।


💐मनुष्य का सच्चा साथी पूर्ण परमात्मा ही है। जिसकी भक्ति करने से सभी कष्ट और दुख दूर होते हैं।


💐समय रहते सत भक्ति तथा शुभ कर्म नहीं की तो अगले जन्म में पशु, पक्षी आदि का जीवन प्राप्त करके महा कष्ट उठाने पड़ेंगे।


💐भक्ति से आर्थिक, मानसिक और शारीरिक सुख होता है। इसलिए भक्ति करना जरूरी है।


💐सतभक्ति करने वाले साधक को परमात्मा सतलोक में लेकर जाते हैं। वहां किसी भी वस्तु का अभाव नहीं है।


💐सुख पिछले पुण्य कर्मों से होता है।

पुण्य कर्मों के संचय के लिए भक्ति ज़रूरी है।

💐भक्ति करने से धन लाभ भी मिलता है और सभी शारीरिक बीमारियां भी खत्म होती हैं।


💐सद्भक्ति एकमात्र उपाय है जिससे मनुष्य में दैवीय गुणों का प्रसार शुरू होता है और राक्षस प्रवृत्ति की समाप्ति होती है।

Comments

Post a Comment